Menu
Search

Loading story

नगर पंचायत अध्यक्ष पर गंभीर अनियमितताओं के आरोप, पद पर संकट के बादल

नगर पंचायत अध्यक्ष पर गंभीर अनियमितताओं के आरोप, पद पर संकट के बादल

धरमजयगढ़ – धरमजयगढ़ 2300 की आबादी एवं 15 वार्डों वाली नगर पंचायत धरमजयगढ़ की अध्यक्ष पर गंभीर प्रशासनिक, वित्तीय एवं वैधानिक अनियमितताओं के आरोप सामने आए हैं। नगर पंचायत का गठन 7 मार्च 2024 को शपथ ग्रहण के साथ हुआ था। वर्तमान परिषद में सत्ताधारी दल के 10 पार्षद, विपक्ष के 4 पार्षद तथा 1 निर्दलीय पार्षद शामिल हैं।

आरोप है कि महज 10 माह के कार्यकाल में ही नगर पंचायत अध्यक्ष द्वारा नगर पंचायत अधिनियम, राजस्व नियमों एवं संवैधानिक मर्यादाओं की खुलेआम अवहेलना की गई है। यदि इन मामलों की जांच होती है तो अध्यक्ष का पद समाप्त होना तय माना जा रहा है।

नगर की जनता एवं विशेषकर बंग समाज के लोगों ने जिन उम्मीदों के साथ उन्हें मत देकर प्रथम नागरिक चुना था, अध्यक्ष उन अपेक्षाओं पर खरा नहीं उतर सकीं। आरोप है कि अपने व्यक्तिगत स्वार्थ एवं आपसी द्वेष के चलते जनहित के कार्यों को नुकसान पहुंचाया गया। बिना पी.आई.सी. अथवा परिषद की अनुमति एवं प्रस्ताव के ट्रिब्यूलर लाइट का स्थल परिवर्तन कर दिया गया। इसके अलावा वैध रूप से स्वीकृत निविदाकार की निविदा को निरस्त कर अधिक दर पर अन्य कार्य कराए जाने के आरोप भी सामने आए हैं।

नगर पंचायत में नियमों को ताक पर रखकर कई प्रकार की अनियमितताएं किए जाने की चर्चाएं तेज हैं। नगर पालिका अधिनियम 1961 की धारा 339 के अनुसार नगरीय क्षेत्र में बिना नगर पंचायत की अनुमति एवं रेरा पंजीयन के प्लाटिंग अवैधानिक है, इसके बावजूद अध्यक्ष पर अवैध प्लाटिंग कर भूमि के क्रय-विक्रय में प्रत्यक्ष रूप से संलिप्त होने के आरोप लगाए गए हैं। शपथ लेने के बाद भी पद की धौंस दिखाकर शासन के नियमों को दरकिनार कर निजी व्यवसाय संचालित किए जाने की बातें सामने आई हैं।

इतना ही नहीं, विस्थापितों को आबंटित भूमि में कई खातेदारों के साथ खसरा वी-1 में नाम दर्ज कराए जाने का मामला भी सामने आया है, जो कि भू-राजस्व संहिता 1959 की धारा 165 (7-ख) का स्पष्ट उल्लंघन है। आरोप है कि इन आबंटित भूमियों की अवैध खरीद-फरोख्त एवं प्लाटिंग में अध्यक्ष की भूमिका रही है।

उल्लेखनीय है कि वर्ष 2006-07 में भी इसी नगर पंचायत अध्यक्षा के विरुद्ध वित्तीय अनियमितता की शिकायत सही पाए जाने पर तत्कालीन कलेक्टर द्वारा पद से पृथक कर अग्रिम कार्रवाई हेतु प्रकरण नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग को भेजा गया था।

नगर में यह भी चर्चा है कि वर्तमान कार्यकाल में अध्यक्ष नगर के विकास हेतु शासन से अपेक्षित फंड लाने में असफल रही हैं, वहीं प्राप्त फंड का उपयोग द्वेषपूर्ण भावना के चलते निविदाएं निरस्त कर अथवा नियम विरुद्ध स्थल परिवर्तन कर किया गया। राजस्व विभाग एवं नगर पालिका अधिनियम की अनदेखी करते हुए कई ऐसे कार्य किए गए हैं, जो संदेह के घेरे में हैं।

सूत्रों के अनुसार विपक्ष द्वारा अध्यक्ष के विरुद्ध पर्याप्त दस्तावेजी साक्ष्य एकत्रित कर उच्चस्तरीय शिकायत दर्ज कराने की तैयारी की जा रही है। यदि जांच प्रारंभ होती है और आरोप प्रमाणित होते हैं, तो नगर पंचायत अध्यक्ष की कुर्सी जाना तय माना जा रहा है।

Author
संपादक : दीपक कुमार हलदार
Hamar Goth News 24

हमारे इस पोर्टल का उद्देश्य क्षेत्र की खबरों और जनहित से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी लोगों तक पहुंचाना है।

Leave Your Comment