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धरमजयगढ़ - केपीसीएल परियोजना को लेकर प्रभावित क्षेत्र के ग्रामीणों में नाराजगी लगातार बढ़ती नजर आ रही है। इसी कड़ी में कल ग्रामीणों ने एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित कर अपनी आगामी रणनीति पर विस्तार से चर्चा की। बैठक में बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने अपनी बात रखते हुए एक स्वर में कहा कि किसी भी कीमत पर अपनी जमीन नहीं देंगे।
बैठक में ग्रामीणों ने कहा कि जमीन केवल खेत का टुकड़ा नहीं, बल्कि उनके परिवार की रोजी-रोटी, पहचान और आने वाली पीढ़ियों का भविष्य है। इसलिए विकास के नाम पर जमीन लेने की किसी भी कोशिश का ग्रामीण एकजुट होकर विरोध करेंगे।
ग्रामीणों ने बैठक के दौरान आंदोलन को आगे किस तरीके से मजबूती दी जाए, इस पर भी चर्चा की। आने वाले दिनों में ग्रामीणों को एकजुट करने, प्रभावित परिवारों से संपर्क बढ़ाने और प्रशासन एवं संबंधित अधिकारियों तक मजबूती से पहुंचाने को लेकर रणनीति पर विचार किया गया।
बैठक से ग्रामीणों ने साफ संदेश देने की कोशिश की कि यह लड़ाई किसी एक व्यक्ति या गांव की नहीं, बल्कि जमीन और भविष्य की लड़ाई है। ग्रामीणों ने कहा कि वे शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से अपनी आवाज उठाते रहेंगे, लेकिन अपनी जमीन के मामले में किसी भी तरह का समझौता स्वीकार नहीं करेंगे।
अब सवाल यह है कि क्या ग्रामीणों के विरोध के बीच केपीसीएल परियोजना आगे बढ़ेगी, या प्रशासन ग्रामीणों की आपत्तियों और मांगों को गंभीरता से लेकर कोई रास्ता निकालेगा?
“एक रहेंगे, संगठित रहेंगे और अपनी जमीन की लड़ाई मजबूती से लड़ेंगे।”
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