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धरमजयगढ़ में DMF के ₹8.52 करोड़ के काम पर उठे सवाल, ₹5.12 करोड़ भुगतान के बाद भी कृषि उपकरणों की सप्लाई को लेकर चर्चा

धरमजयगढ़ में DMF के ₹8.52 करोड़ के काम पर उठे सवाल, ₹5.12 करोड़ भुगतान के बाद भी कृषि उपकरणों की सप्लाई को लेकर चर्चा

धरमजयगढ़/रायगढ़- धरमजयगढ़ जनपद पंचायत क्षेत्र में जिला खनिज न्यास (DMF) मद से वन अधिकार पट्टाधारकों के लिए कृषि उपकरण सामग्री की प्रस्तावित सप्लाई को लेकर गंभीर सवाल सामने आए हैं। एक प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2022-23 में 16 ग्राम पंचायतों के 1,906 वन अधिकार पट्टाधारकों के लिए कृषि उपकरण उपलब्ध कराने हेतु कुल ₹8,51,98,200 की सामग्री का काम स्वीकृत किया गया था। रिपोर्ट के मुताबिक अब तक करीब ₹5,12,18,920 का भुगतान किया जा चुका है।


रिपोर्ट के अनुसार यह कार्य धरमजयगढ़ जनपद के तत्कालीन जनपद CEO के कार्यकाल के दौरान प्रस्तावित हुआ था। इसमें सोहनपुर भाग-1, सोहनपुर भाग-2, कमोसिनडांड, आमापाली, सिसरिंगा, बरतापाली, ओंगना, जबगा, साजापाली, नेवार, पुटुकछार, पारेमेर, दर्रीडीह, सोनपुर, साम्हरसिंघा और जमरगा ग्राम पंचायतों को शामिल किया गया था। प्रत्येक हितग्राही के लिए करीब ₹44,700 के हिसाब से सामग्री उपलब्ध कराने का उल्लेख रिपोर्ट में है।


किस कंपनी को मिला था काम?

प्रकाशित रिपोर्ट के मुताबिक कृषि उपकरण सामग्री की सप्लाई का ठेका बिलासपुर स्थित सांई इंटरप्राइजेस को दिया गया था। रिपोर्ट में फर्म के संचालक के रूप में संजय शेंडे का नाम उल्लेखित है। रिपोर्ट यह भी बताती है कि शेंडे का नाम छत्तीसगढ़ के बड़े DMF प्रकरण की जांच में आरोपी के रूप में सामने आया है।


₹2 करोड़ कमीशन का दावा

मामले को लेकर प्रकाशित रिपोर्ट में दावा किया गया है कि ठेका मिलने के बाद करीब ₹2 करोड़ नकद कमीशन दिए जाने की बात सामने आई। रिपोर्ट में इसे टेंडर राशि के लगभग 20–25 प्रतिशत के बराबर बताया गया है।

₹5.12 करोड़ भुगतान, सामग्री को लेकर सवाल

रिपोर्ट में सबसे महत्वपूर्ण सवाल करीब ₹5.12 करोड़ के भुगतान को लेकर उठाया गया है। कुल ₹8.52 करोड़ के प्रस्तावित काम में से इतनी राशि का भुगतान होने के बावजूद कृषि उपकरण सामग्री की वास्तविक सप्लाई, हितग्राहियों तक सामग्री पहुंचने और वितरण के दस्तावेजों को लेकर सवाल उठाए गए हैं।


यही वजह है कि मामले में यह जांच महत्वपूर्ण हो जाती है कि 1,906 हितग्राहियों के लिए स्वीकृत सामग्री वास्तव में कितनी खरीदी गई, कितनी सप्लाई हुई और कितने हितग्राहियों को उसका लाभ मिला।


हालांकि, यह एक मीडिया रिपोर्ट में किया गया दावा है। Hamar Goth News 24 की ओर से इसे तब तक प्रमाणित तथ्य नहीं माना जा सकता, जब तक संबंधित जांच एजेंसी, न्यायालय या सक्षम सरकारी प्राधिकरण से इसकी आधिकारिक पुष्टि न हो।

Author
संपादक : दीपक कुमार हलदार
Hamar Goth News 24

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