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धरमजयगढ़- धरमजयगढ़ थाना क्षेत्र में ढाबा संचालक के साथ कथित मारपीट और अशोभनीय व्यवहार की शिकायत के बाद पुलिस विभाग में कार्रवाई हुई है। मामले में प्रधान आरक्षक प्रकाश गिरी गोस्वामी को निलंबित कर दिया गया है, जबकि आरक्षक विजय राठिया को रक्षित केंद्र पुलिस लाइन अटैच किया गया है।मामले की प्राथमिक जांच की जिम्मेदारी एसडीओपी धरमजयगढ़ सिद्धांत तिवारी को सौंपी गई है।
जानकारी के अनुसार, धरमजयगढ़ क्षेत्र के बिहारी ढाबा संचालक मोंटू गुप्ता ने आरोप लगाया कि 23 सितंबर की रात कुछ पुलिसकर्मी ढाबे पर पहुंचे थे। इसी दौरान विवाद की स्थिति बनी और उसके साथ कथित रूप से मारपीट की गई।
शिकायतकर्ता ने पुलिसकर्मियों के व्यवहार को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए हैं। घटना से संबंधित CCTV फुटेज होने की बात भी शिकायत में सामने आई है।
घटना के बाद 24 सितंबर को ढाबा संचालक रायगढ़ एसपी कार्यालय पहुंचा और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक शशि मोहन सिंह के समक्ष लिखित शिकायत प्रस्तुत की। शिकायत में घटना की जांच और संबंधित पुलिसकर्मियों के विरुद्ध कार्रवाई की मांग की गई। शिकायत मिलने के बाद मामले को गंभीरता से लेते हुए संबंधित पुलिसकर्मियों के विरुद्ध प्रारंभिक कार्रवाई की गई।
प्रारंभिक परीक्षण के बाद प्रधान आरक्षक प्रकाश गिरी गोस्वामी को कर्तव्य में लापरवाही एवं अनुशासनहीनता प्रथम दृष्टया पाए जाने पर निलंबित किया गया है।
वहीं आरक्षक विजय राठिया को रक्षित केंद्र पुलिस लाइन अटैच किया गया है। पुलिस विभाग की ओर से मामले की प्राथमिक जांच एसडीओपी धरमजयगढ़ को सौंपी गई है। जांच में शिकायत, CCTV फुटेज सहित उपलब्ध अन्य साक्ष्यों का परीक्षण किया जाएगा।
मामले में पुलिस विभाग द्वारा की गई प्रारंभिक कार्रवाई के बाद अब सबसे बड़ा सवाल जांच रिपोर्ट को लेकर है। क्या CCTV फुटेज और अन्य साक्ष्यों से शिकायत में लगाए गए आरोपों की पुष्टि होती है? क्या जांच में अन्य पुलिसकर्मियों की भूमिका भी सामने आएगी? और क्या जांच पूरी होने के बाद कार्रवाई का दायरा बढ़ेगा?
1. ढाबा संचालक के साथ उस रात वास्तव में क्या हुआ था?
2. CCTV फुटेज में घटना का पूरा घटनाक्रम क्या सामने आता है?
3. मौके पर मौजूद सभी पुलिसकर्मियों की भूमिका की जांच होगी या नहीं?
4. प्राथमिक जांच में किन तथ्यों के आधार पर निलंबन और लाइन अटैच की कार्रवाई की गई?
5. अंतिम जांच रिपोर्ट आने के बाद क्या विभागीय कार्रवाई और आगे बढ़ेगी?
मामले में फिलहाल पुलिस विभाग की ओर से प्रारंभिक कार्रवाई की गई है। ढाबा संचालक द्वारा लगाए गए आरोपों को जांच के अंतिम निष्कर्ष तक आरोप के रूप में ही देखा जाना चाहिए। जांच रिपोर्ट के बाद ही घटनाक्रम की वास्तविक स्थिति पूरी तरह स्पष्ट होगी।
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