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झीरम कांड पर 31 अगस्त को फैसला! 13 साल बाद अदालत के निर्णय पर टिकीं पूरे छत्तीसगढ़ की निगाहें

झीरम कांड पर 31 अगस्त को फैसला! 13 साल बाद अदालत के निर्णय पर टिकीं पूरे छत्तीसगढ़ की निगाहें

धर्मजयगढ़- छत्तीसगढ़ के इतिहास की सबसे भयावह नक्सली घटनाओं में शामिल झीरम घाटी कांड को लेकर अगस्त का अंतिम सप्ताह बेहद अहम होने जा रहा है। वर्ष 2013 में हुए इस भीषण नक्सली हमले के करीब 13 वर्ष बाद जगदलपुर स्थित NIA की विशेष अदालत में चली सुनवाई के बाद अब 31 अगस्त को फैसला सुनाए जाने की तारीख तय की गई है। फैसले को लेकर पीड़ित परिवारों से लेकर राजनीतिक दलों और प्रदेश की जनता तक में उत्सुकता बनी हुई है।


25 मई 2013 को दहला था पूरा छत्तीसगढ़


25 मई 2013 को कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा का काफिला दरभा क्षेत्र की झीरम घाटी से गुजर रहा था। इसी दौरान पहले से घात लगाकर बैठे माओवादियों ने काफिले पर बड़ा हमला कर दिया। अचानक हुए इस हमले में तत्कालीन कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष नंद कुमार पटेल, बस्तर टाइगर महेंद्र कर्मा, वरिष्ठ नेता विद्याचरण शुक्ल सहित कई कांग्रेस नेताओं, सुरक्षाकर्मियों और आम नागरिकों की मौत हो गई थी।


यह हमला छत्तीसगढ़ की राजनीति और नक्सल हिंसा के इतिहास की सबसे दर्दनाक घटनाओं में दर्ज हो गया।


13 साल बाद फैसले की घड़ी


मामले में NIA की जांच के अनुसार हमले में 27 लोगों की मौत और 35 लोग घायल हुए थे। जांच एजेंसी ने कई आरोपियों को नामजद किया और बड़ी संख्या में माओवादियों को मामले में आरोपी बनाया। NIA द्वारा गिरफ्तार किए गए 11 आरोपियों में से एक की मृत्यु हो चुकी है, जबकि शेष आरोपियों के विरुद्ध विशेष अदालत में सुनवाई चली।


हाल ही में लगातार तीन दिनों तक अभियोजन और बचाव पक्ष ने अपनी-अपनी दलीलें अदालत के समक्ष रखीं। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने फैसला सुरक्षित रख लिया और अब 31 अगस्त 2026 को निर्णय सुनाने की तारीख तय की गई है।


फैसले पर टिकीं राजनीतिक दलों की निगाहें


झीरम कांड केवल एक आपराधिक मामला नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की राजनीति से गहराई से जुड़ा संवेदनशील अध्याय भी है। घटना में प्रदेश के कई दिग्गज राजनीतिक नेताओं की हत्या हुई थी। यही वजह है कि अदालत के आने वाले फैसले को लेकर कांग्रेस सहित विभिन्न राजनीतिक दलों, कार्यकर्ताओं और पीड़ित परिवारों की निगाहें टिकी हुई हैं।


31 अगस्त को अदालत का फैसला झीरम कांड की कानूनी लड़ाई में एक महत्वपूर्ण पड़ाव साबित हो सकता है। अब सबकी नजरें उस दिन पर हैं, जब करीब 13 वर्षों से चले आ रहे इस मामले में अदालत अपना निर्णय सुनाएगी।

Author
संपादक : दीपक कुमार हलदार
Hamar Goth News 24

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