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धर्मजयगढ़ -केंद्र सरकार जनताओ की भौतिक सुविधाएं उपलब्ध कराने विभिन्न प्रकार की योजनाएं प्रारंभ करती है। जिसमें विद्युत जीवन की अहम सुविधा चाहे वह सोलर से ,जल विद्युत, थर्मल पॉवर या अन्य किसी माध्यम से हो इसी कड़ी में धर्मजयगढ़ अनुविभाग में सरकार R.D.S.S. स्कीम की तहत विद्युत लाइन का पूर्ण स्थापना के साथ विद्युत की तमाम सुविधाएं देने की व्यवस्था कर रही है
धर्मजयगढ़ अनुविभाग कोल बैरिंग क्षेत्र होने व इसी क्षेत्र में उक्त कंपनी द्वारा आम आदमी, व्यापारी व किसानों के विद्युत सुविधा सुगम, सरल प्रदान करने पंप फीडर सब स्टेशन तथा नया लाइन का काम जोर शोर से चल रहा है। क्षेत्र कोल बैरिंग होने के कारण S.E.C.L. तथा K.P.C.L.अधिग्रहित क्षेत्र में इन विद्युत का विस्तार A.K इन्फ्रा बनारस यूपी की कंपनी द्वारा किया जा रहा है।
S.E.C.L.को 2016 में तथा K.P.C.L.को 2020 में कोल ब्लॉक स्थापित करने के लिए संपूर्ण प्रक्रिया पूर्ण कर चुकी है। अधिग्रहण की भूमि का रकबा लगभग 4414 व 3000 एकड़ भूमि है इन क्षेत्र में पहले से ही विद्युत व्यवस्था उपलब्ध है। इन क्षेत्रों में भी कंपनी के द्वारा विद्युत लाइन का विस्तार बड़े पैमाने पर किया जा रहा है।
कोल कंपनी द्वारा मुआवजा के समय अन्य विभागों की उपक्रम व किए गए कार्य का गणना कर संबंधित विभाग को खदान खोलने के पूर्व प्रदान करेगी , अधिग्रहण होने के बाद दूसरे कंपनी द्वारा यादि निर्माण कार्य या अन्य कार्य करती है।तो अध्यतन स्थिति की गणना में कोल कंपनी को भारी भरकम मुआवजा देना पड़ेगा।
S.E.C.L व K.P.C.L. के द्वारा प्रस्तावित किसानों को भूमि पर अवैधानिक रूप से डायवर्सन व रजिस्ट्री होने पर अनुविभाग द्वारा तत्काल रोक लगाने के लिए पत्र जारी किया गया तथा राज्य शासन के अदेश अनुसार अधिग्रहित क्षेत्र की भूमि में भूअर्जन अंकित करवा दिया तथा रजिस्ट्री पर भी रोक लगा दिया।
स्थानीय प्रशासन द्वारा भारतमाला प्रोजेक्ट में अधिग्रहण की आशय में किसानों को भूमि पर बिना स्वीकृत किए निर्माण को ढहा दिया जाता है। तथा अवैधानिक रजिस्ट्री डायवर्शन पर रोक लगाना भूमि की खसरा, B1 मे उन्हें भू अर्जन लिख दिया जाना ठीक है। पर बड़ी कंपनी के द्वारा किया जा कार्य पर रोक क्यों नहीं जो चर्चा के विषय बना हुआ है l
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