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छत्तीसगढ़-ओडिशा की तीन कोयला परियोजनाओं के लिए 3.30 लाख पेड़ों की होगी बलि!

छत्तीसगढ़-ओडिशा की तीन कोयला परियोजनाओं के लिए 3.30 लाख पेड़ों की होगी बलि!

धरमजयगढ़- छत्तीसगढ़ और ओडिशा में कोयला उत्पादन बढ़ाने की दिशा में तीन प्रमुख कोयला परियोजनाओं को लेकर पर्यावरणीय मंजूरी की प्रक्रिया आगे बढ़ी है। पर्यावरण संबंधी अधिकार प्राप्त समिति ने इन परियोजनाओं को स्टेज-1 (फॉरेस्ट क्लीयरेंस) देने की सिफारिश की है।


समिति के प्रस्ताव के अनुसार तीनों परियोजनाओं के लिए कुल 1737 हेक्टेयर वन भूमि के डायवर्सन का प्रस्ताव रखा गया है। इन परियोजनाओं के अंतर्गत आने वाली वन भूमि में लगभग 3.30 लाख पेड़ होने का अनुमान है।


इन परियोजनाओं में रायगढ़ जिले के धरमजयगढ़ तहसील की पुरुंगा अंडरग्राउंड माइंस, पेलमा ओपन कास्ट तथा ओडिशा की अलकनंदा कोल माइंस शामिल हैं।


वन भूमि डायवर्सन की अनुमति मिलने और फॉरेस्ट क्लीयरेंस की प्रक्रिया पूरी होने के बाद इन परियोजनाओं के विकास और कोयला उत्पादन का रास्ता साफ हो सकता है। हालांकि, बड़े पैमाने पर वन भूमि के डायवर्सन और पेड़ों की कटाई को लेकर पर्यावरण संरक्षण और विकास के बीच संतुलन को लेकर सवाल भी उठ रहे हैं।


धरमजयगढ़-छत्तीसगढ़ और ओडिशा में कोयला उत्पादन बढ़ाने की दिशा में तीन प्रमुख कोयला परियोजनाओं को लेकर पर्यावरणीय मंजूरी की प्रक्रिया आगे बढ़ी है। पर्यावरण संबंधी अधिकार प्राप्त समिति ने इन परियोजनाओं को स्टेज-1 (फॉरेस्ट क्लीयरेंस) देने की सिफारिश की है।


समिति के प्रस्ताव के अनुसार तीनों परियोजनाओं के लिए कुल 1737 हेक्टेयर वन भूमि के डायवर्सन का प्रस्ताव रखा गया है। इन परियोजनाओं के अंतर्गत आने वाली वन भूमि में लगभग 3.30 लाख पेड़ होने का अनुमान है।


इन परियोजनाओं में रायगढ़ जिले के धरमजयगढ़ तहसील की पुरुंगा अंडरग्राउंड माइंस, पेलमा ओपन कास्ट तथा ओडिशा की अलकनंदा कोल माइंस शामिल हैं।


वन भूमि डायवर्सन की अनुमति मिलने और फॉरेस्ट क्लीयरेंस की प्रक्रिया पूरी होने के बाद इन परियोजनाओं के विकास और कोयला उत्पादन का रास्ता साफ हो सकता है। हालांकि, बड़े पैमाने पर वन भूमि के डायवर्सन और पेड़ों की कटाई को लेकर पर्यावरण संरक्षण और विकास के बीच संतुलन को लेकर सवाल भी उठ रहे हैं।


धरमजयगढ़। छत्तीसगढ़ और ओडिशा में कोयला उत्पादन बढ़ाने की दिशा में तीन प्रमुख कोयला परियोजनाओं को लेकर पर्यावरणीय मंजूरी की प्रक्रिया आगे बढ़ी है। पर्यावरण संबंधी अधिकार प्राप्त समिति ने इन परियोजनाओं को स्टेज-1 (फॉरेस्ट क्लीयरेंस) देने की सिफारिश की है।


समिति के प्रस्ताव के अनुसार तीनों परियोजनाओं के लिए कुल 1737 हेक्टेयर वन भूमि के डायवर्सन का प्रस्ताव रखा गया है। इन परियोजनाओं के अंतर्गत आने वाली वन भूमि में लगभग 3.30 लाख पेड़ होने का अनुमान है।


इन परियोजनाओं में रायगढ़ जिले के धरमजयगढ़ तहसील की पुरुंगा अंडरग्राउंड माइंस, पेलमा ओपन कास्ट तथा ओडिशा की अलकनंदा कोल माइंस शामिल हैं।


वन भूमि डायवर्सन की अनुमति मिलने और फॉरेस्ट क्लीयरेंस की प्रक्रिया पूरी होने के बाद इन परियोजनाओं के विकास और कोयला उत्पादन का रास्ता साफ हो सकता है। हालांकि, बड़े पैमाने पर वन भूमि के डायवर्सन और पेड़ों की कटाई को लेकर पर्यावरण संरक्षण और विकास के बीच संतुलन को लेकर सवाल भी उठ रहे हैं।1737 हेक्टेयर वन भूमि डायवर्सन का प्रस्ताव, पर्यावरण समिति ने स्टेज-1 फॉरेस्ट क्लीयरेंस की सिफारिश की

1737 हेक्टेयर वन भूमि डायवर्सन का प्रस्ताव, पर्यावरण समिति ने स्टेज-1 फॉरेस्ट क्लीयरेंस की सिफारिश की

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संपादक : दीपक कुमार हलदार
Hamar Goth News 24

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