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गड्ढों में गुम हुई नगर पंचायत की व्यवस्था!

गड्ढों में गुम हुई नगर पंचायत की व्यवस्था!

1500 मीटर सड़क नहीं संभल रही तो 15 वार्डों का विकास कैसे होगा? हादसों के बाद भी जिम्मेदारों की आंखों पर पट्टी!


धरमजयगढ़ में सड़क बनी मुसीबत का रास्ता, रोज हजारों लोग और छात्र-छात्राएं जोखिम में


धरमजयगढ़-नगर पंचायत धरमजयगढ़ की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाने के लिए अब किसी बड़े उदाहरण की जरूरत नहीं है। बस स्टैंड से गांधी चौक होते हुए पीपरमार चौक तक महज 1500 मीटर सड़क ही व्यवस्था की पोल खोलने के लिए काफी है। सड़क पर जगह-जगह गड्ढे हैं, आवागमन मुश्किल है और दुर्घटना का खतरा लगातार बना हुआ है। बावजूद इसके जिम्मेदार तंत्र मानो कुंभकर्णी नींद में सोया हुआ है।


करीब 22 हजार आबादी और 15 वार्डों वाली नगर पंचायत में यह सड़क बेहद महत्वपूर्ण है। इसी मार्ग से बस स्टैंड, महाविद्यालय, कन्या हाईस्कूल और डाइट जैसे प्रमुख संस्थानों तक पहुंच होती है। प्रतिदिन हजारों लोग और विद्यार्थी इस सड़क से गुजरते हैं। लेकिन सड़क की बदहाली देखकर ऐसा लगता है मानो जनता की परेशानी नगर पंचायत की प्राथमिकता सूची में कहीं है ही नहीं।


महाविद्यालय के सामने मौत के गड्ढे!


सड़क पर बने गड्ढे अब सिर्फ असुविधा नहीं, बल्कि हादसे का खुला निमंत्रण बन चुके हैं। महाविद्यालय के सामने स्थिति विशेष रूप से खराब बताई जा रही है। स्थानीय लोगों के अनुसार यहां कई बार दुर्घटनाएं हो चुकी हैं।


छात्र-छात्राओं को रोज इसी जोखिम भरे रास्ते से गुजरना पड़ता है। सवाल सीधा है—क्या किसी बड़े हादसे में किसी की जान जाने के बाद ही नगर पंचायत जागेगी?


JCB खड़ी, कर्मचारी मौजूद... फिर गड्ढे क्यों नहीं भर रहे?


सबसे बड़ा सवाल नगर पंचायत के संसाधनों को लेकर है। बताया जाता है कि नगर पंचायत के पास JCB, कर्मचारी, CMO और इंजीनियरिंग अमला उपलब्ध है। फिर भी सड़क के गड्ढों को भरने जैसा प्राथमिक काम महीनों से क्यों नहीं हो पा रहा?


जब सड़क की हालत इतनी खराब है तो जीरा-गिट्टी डालकर तत्काल मरम्मत क्यों नहीं की जा रही?


क्या इसके लिए भी किसी बड़े टेंडर, आदेश या वीआईपी दौरे का इंतजार किया जा रहा है?


डीजल पर खर्च, लेकिन सड़क पर काम नहीं?


नगर पंचायत के खर्चों को लेकर भी जनता सवाल पूछ रही है। यदि मशीनरी और कर्मचारियों के संचालन पर नियमित रूप से खर्च हो रहा है, तो उसका फायदा जनता को दिखाई क्यों नहीं दे रहा?


जनता का सवाल है—जब JCB चल सकती है, डीजल खरीदा जा सकता है और कर्मचारी उपलब्ध हैं, तो 1500 मीटर सड़क के गड्ढे क्यों नहीं भरे जा सकते?


सत्ता पक्ष की परिषद भी सवालों के घेरे में


नगर पंचायत में सत्ता पक्ष की परिषद होने के बावजूद नगर की इस प्रमुख सड़क की हालत लगातार खराब होना परिषद की प्राथमिकताओं पर सवाल खड़ा करता है।


नगरवासियों का कहना है कि विकास के दावे कागजों और बैठकों में चाहे जितने किए जाएं, सड़क पर पड़े गड्ढे हकीकत बता रहे हैं।


15 वार्डों वाली नगर पंचायत अगर अपनी सीमा के भीतर की महज 1500 मीटर महत्वपूर्ण सड़क की सुध नहीं ले पा रही है, तो फिर बड़े विकास कार्यों के दावों पर जनता कैसे भरोसा करे?


अब जनता पूछ रही है 5 सीधे सवाल


1. सड़क की मरम्मत आखिर कब होगी?

2. हादसों के बावजूद जिम्मेदार अधिकारी क्यों नहीं जाग रहे?

3. JCB और कर्मचारी उपलब्ध होने के बाद भी गड्ढे क्यों नहीं भरे जा रहे?

4. नगर पंचायत के संसाधनों और डीजल खर्च का वास्तविक उपयोग कहां हो रहा है?

5. क्या किसी बड़े हादसे का इंतजार किया जा रहा है?


अब बहाने नहीं, काम चाहिए


धरमजयगढ़ की जनता को अब आश्वासन नहीं, सड़क चाहिए। निरीक्षण की औपचारिकता नहीं, गड्ढों की तत्काल मरम्मत चाहिए। कागजी कार्रवाई नहीं, जमीन पर दिखाई देने वाला काम चाहिए।


क्योंकि सड़क पर पड़ा हर गड्ढा सिर्फ विकास की कहानी नहीं बताता—वह व्यवस्था से पूछ रहा है कि आखिर जनता की सुरक्षा की जिम्मेदारी किसकी है?

Author
संपादक : दीपक कुमार हलदार
मेरा नाम दीपक कुमार हलदार है, और मैं Hamar Goth News 24 का संस्थापक एवं संपादक हूँ।

मैंने इस पोर्टल की स्थापना इस उद्देश्य से की है कि हमारे जैसे छोटे शहरों, गांवों और आदिवासी क्षेत्रों की आवाज़ भी मीडिया के मुख्यधारा में शामिल हो सके। Hamar Goth News 24 सिर्फ एक न्यूज़ वेबसाइट नहीं है, यह एक जनमंच है, जहाँ आम लोगों की बातें, समस्याएं, उपलब्धियां और उम्मीदें सुनी और साझा की जाती हैं।

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